MPPSC pre exam pattern me kya badlaw hue | 3R-W प्लान क्या है, फायदा होगा या नुकसान? | प्रारंभिक परीक्षा में हुए 4 बड़े बदलाव | 3R-W पद्धति क्या है | परफॉर्मेंस में पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव
हाल ही में PSC ने नेगेटिव मार्किंग लागू की थी और अब तो पूरा का पूरा एग्जाम पैटर्न ही बदल दिया है. पहले जहां पेपर 1 और पेपर 2 200 200 अंकों के होते थे और 100 क्वेश्चन पूछे जाते थे बिना नेगेटिव मार्किंग के, वही अब नेगेटिव मार्किंग के साथ ही दोनों पेपर 300-300 अंकों के होंगे और दोनों प्रश्न पत्र में 100 ही क्वेश्चन पूछे जाएंगे l
MPPSC pre exam pattern me kya badlaw hue
आज के इस आर्टिकल में हम आपको MPPSC pre exam pattern me kya badlaw hue ये बताने वाले हैं . अगर आप राज्य सेवा भर्ती की तैयारी कर रहे हैं और इस सेशन की प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं तो इस आर्टिकल को अंत तक पढ़ें . PSC द्वारा आगामी साथ हेतु ली जाने वाली प्रारम्भिक परीक्षा के पैटर्न में एक नहीं कई बदलाव किए हैं.
MPPSC pre exam pattern overview
| Topic | MPPSC pre exam pattern me kya badlaw hue |
| Organization | Madhya Pradesh Public Service Commission, Indore |
| State | Madhya Pradesh |
| Academic year | 2026-27 |
| Article type | Exam pattern |
| Post | 150+ |
| Eligibility | Graduate candidate |
| Exam Pattern | Mentioned below |
| Official website | www.mppsc.mp.gov.in |

प्रारंभिक परीक्षा में हुए 4 बड़े बदलाव
- Negative marking हुई लागू
- 300 अंकों के होंगे प्रश्न पत्र
- 100 प्रश्नं पूछे जाएंगे
- 3R-W के आधार पर होगा मूल्यांकन
10 जनवरी से शुरू होगा आवेदन
जारी नोटिफिकेशन के अनुसार मध्य प्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा के लिए दिनांक 10 जनवरी 2026 से आवेदन फॉर्म स्वीकार किए जाएंगे जो कि ऑनलाइन मोड पर ही मान्य है . और आवेदन की अंतिम तिथि दिनांक 9 फरवरी 2026 निर्धारित है . 26 अप्रैल 2026 को परीक्षा संचालित होगी जो कि 2 शिफ्ट में होगी.
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3R-W पद्धति क्या है
जैसा कि आप जानते है कि प्रारंभिक परीक्षा में पहले कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं थी तो इसमें मूल्यांकन करना काफी आसान होता था . PSC ने नेगेटिव मार्किंग लागू किया जिसके बाद ये रूल बनाया गया कि प्रत्येक सही उत्तर के लिए 3 अंक दिए जाएंगे और एक गलत उत्तर के लिए 1 अंक काटे जाएंगे . इसमें मूलांकन करना बहुत ही आसान होगा और स्कोर भी दशमलव में न होकर पूर्ण अंकों में होगा.
परफॉर्मेंस में पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव
पहले नेगेटिव मार्किंग न होने से लोग अनुमान लगाकर pre क्लियर कर लेते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. अब प्रारंभिक परीक्षा वही क्लियर कर पाएगा जिसने वाकई में तैयारी की है और बाकी के लोगों को फिल्टर कर दिया जाएगा. नेगेटिव मार्किंग के बाद से कैंडीडेट्स में जागरूकता बढ़ गई है और वो परीक्षा को लेकर पहले की तुलना में अब काफी गंभीर हैं, जो कि एक सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है.
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